क्या आने वाले 2050 तक खत्म हो जाएगी धरती से मिट्टी और सिर्फ बचेगा रेत ही रेत ?

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चम्पारण:- हमारी धरती पर उपलब्ध खेती का अधिकांश हिस्सा दिन-ब-दिन मिट्टी से रेत में तब्दील होता जा रहा है। ये संकेत है बहुत ही बड़े संकट का जिससे समय रहते बचा जा सकता है। ईशा फाउंडेशन और सद गुरु की ओर से एक अभियान चलाया गया है “मिट्टी बचाओ” अभियान जो एक बहुत ही महत्वपूर्ण अभियान है। लगभग पूरी दुनिया अब इस अभियान से जुड़ चुकी है। गांव के किसानों को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत है। क्योंकि बढ़ते खाद के उपयोग के कारण मिट्टी बालू में तब्दील हो रहा है। पहले की तरह अब मिट्टी नहीं है। ये एक गंभीर समस्या है जिससे गावों के किसानों को सजग करने की ज़रूरत है।

इसी को लेकर पूर्वी चंपारण के रक्सौल के भेलाही पंचायत की मुखिया सुमन पटेल के द्वारा मिट्टी बचाओ अभियान के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें पंचायत के सैकड़ो किसानों ने हिस्सा लिया। इस दौरान मुखिया सुमन पटेल ने कहा कि “मिट्टी माँ की तरह है अगर मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो हम सब स्वस्थ रहेंगे। इसलिए मिट्टी को बचाना बहुत जरूरी है ताकि आने वाला भविष्य सुरक्षित हो सके।”

इस दौरान जदयू नेता और प्रदेश सचिव भुवन पटेल भी मौजूद रहे। जिन्होंने मिट्टी बचाओ अभियान के लिए हुंकार भरी और कहा कि “ये मिट्टी हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए जीवन है जिसे हम सब को मिलकर सुरक्षित करना होगा। नहीं तो आने वाले समय में भुखमरी हमारी धरती को बर्बाद कर सकती है, इसलिए इस अभियान से सिर्फ जुड़ना हमारा मकसद नहीं होना चाहिए, जरूरी है कि जमीनी स्तर पर हम किसानों के साथ मिलकर इस जन अभियान को सफल बनाए।”

दुनिया भर के वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर अभी ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले 2050 तक स्थिति बहुत ही खरनाक हो सकती है लोग खाने के लिए एक दूसरे से लड़ेंगे। चंपारण के कई विद्यालय और गांवों में जाकर लोगो को मिट्टी के प्रति जागरूक करने वाले अंकित गुप्ता बताते है कि”अनन्त से है आ रही माँ धरती को प्रणाम है ।
अनन्त तक तू जाएगी, यह मेरा दृढ़ संकल्प है ।
भविष्य की पीढ़ियां भी तेरे गोद में पले ।
तेरे प्रेम के छाव में ,वह भी खिलखिला सके ।
माँ तू हमेशा स्वस्थ रहे, माँ तू हमेशा स्वस्थ रहे ।
इस पृथ्वी पर उत्सव रहे ,इस पृथ्वी पर उत्सव रहे ।
आइए इसे साकार करे माँ धरती की पुकार सुने ।”

ये आने वाली समस्या हमारी पीढ़ी के लिए बहुत ही ख़तरनाक है। इसे सरल तरीके से समझने की जरूरत है। अगर हम गांव के किसानों को वैज्ञानिक तर्कों को समझाने की कोशिश करेंगे तो ये सम्भव नहीं है। किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता में कितना अंतर आया है बस ये समझाने की जरूरत है। समय रहते ही हमारी मिट्टी को बचाना होगा और गोबर और पत्तो से बने ऑर्गेनिक खाद का उपयोग करना होगा। साथ ही इसमें सरकार का सहयोग जरूरी है।

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