West champaran: सेब और चीकू की अब चंपारण में हो रही खेती, कम लागत में किसानों को होता बड़ा मुनाफा

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Champaran News: शांभवी बायोटेक के संचालक रविकांत पांडेय ने बताया कि उनके पास ऐसे यहां की मिट्टी में सफलतापूर्वक उपजने वाले तथा किसानों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने वाले दर्जनों पौधे हैं.

West champaran: सेब और चीकू की अब चंपारण में हो रही खेती, कम लागत में किसानों को होता बड़ा मुनाफा

पश्चिम चंपारण.: वैसे तो चंपारण में बड़े पैमाने पर परंपरागत कृषि की जाती है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आज की तारीख में यहां की मिट्टी में ऐसे फल एवं सब्जियों की सफल खेती होने लगी है, जो किसी समय में चंपारण या फिर यूं कहें तो पूरे बिहार के लिए एक सपना था. स्ट्रॉबेरी, चीकू, रेड बेरी, सेब, गुलाबी कटहल जैसे कई ऐसे फल हैं, जिनकी सफल खेती चम्पारण की मिट्टी में शुरू हो चुकी है.

70 दिनों में पौधों में आने लगे फूल

बेतिया के पर्वतीया नया टोला के निवासी किसान देव कुमार पटेल ने बताया कि उन्होंने महज 2 महीने पहले शांभवी बायोटेक से हिमाचल प्रदेश में पाए जाने वाले सेब की प्रजाति HRMN-99, चीकू तथा वियतनाम की प्रजाति गुलाबी कटहल के पौधे को खरीदा और अपने खेत में उसे लगाया. समय-समय पर पौधों की सही देखरेख तथा पानी देने के बाद आज 70 दिनों में सेब के सभी 12 पौधों में फूल आ चुके हैं. साथ ही चीकू तथा कटहल के पौधों में फल भी लग चुके हैं. पौधों से फलों तथा फूलों का निकलना यह साबित कर चुका है कि अब पश्चिम चंपारण में भी इन सब की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है. हालांकि सेब के पौधे काफी छोटे हैं. इसलिए उनके फलों को अभी हटा दिया जाएगा और एक से डेढ़ साल बाद उनसे फलों की प्राप्ति की जाएगी.

बिलकुल अलग आधुनिक खेती

जिले में शांभवी बायोटेक द्वारा पूर्व लोकसेवक राघव शरण पांडेय के नेतृत्व में स्ट्रॉबेरी, चीकू, रेड बेरी, गुलाबी कटहल इत्यादि फलों के पौधों को अलग-अलग जगहों पर बड़े पैमाने पर लगाए गए. आश्चर्य की बात यह है कि आज वो सभी पौधे फलों से लद चुके हैं. समझने वाली बात यह है कि इस सफलता के बाद किसान परंपरागत कृषि से बिलकुल अलग आधुनिक खेती की तरफ ध्यान दे रहे हैं, जो उनके लिए आर्थिक तथा मानसिक रूप से बेहद ही फायदे का सौदा साबित हो रहा है.

हॉर्टिकल्चर बन रहा किसानों की उम्मीद

परंपरागत कृषि से बिल्कुल अलग चंपारण के किसान अब फलों तथा मेडिसिनल प्लांट्स की बागवानी पर ध्यान दे रहे हैं. शांभवी बायोटेक के संचालक रविकांत पांडेय ने बताया कि उनके पास ऐसे यहां की मिट्टी में सफलतापूर्वक उपजने वाले तथा किसानों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने वाले दर्जनों पौधे हैं, जिसकी खेती द्वारा कृषि की परिभाषा तो बदलेगी ही साथ ही किसानों की दशा भी पूरी तरह बदल जाएगी. बेहद कम लागत में उपजने वाले इन फलों के व्यापार से किसानों को अत्यधिक लाभ होगा.

बेहतर नतीजे के लिए चंपारण में हॉर्टिकल्चर की शुरुआत कर रहा शांभवी बायोटेक खुद पौधों की देखरेख कर रहा है. कोई भी कृषक मोबाइल नंबर – 08092310377 पर बात कर शांभवी बायोटेक के ऑनर रविकांत पांडेय से कृषि संबंधी सलाह ले सकते हैं.

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