करोड़ो की लागत से लगा कचरे से खाद बनाने का प्लांट, चार वर्षों से पड़ा है बंद

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करोड़ो की लागत से बना कचरे से खाद बनाने का प्लांट, चार वर्षों से पड़ा है बंद

मोतिहारी:- स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती है ये आपको चंपारण में आकर देखने को मिल सकता है। ये वही धरती है जहाँ से बाबू ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन किया था। लेकिन यहाँ की हालात आप देख सकते है। मोतिहारी नगर निगम के वार्डों से कचरा के निष्पादन के लिए तकरीबन चार करोड़ की लागत से तीन साल पहले सेग्रिगेशन प्लांट लगाया गया था। जिसमें गीले व सूखे कचरे से अलग अलग खाद बनाने की योजना थी। इसके अलावा प्लास्टिक से भी तेल निकालने के लिए मशीन लगाया गया था। लेकिन, नगर निगम की उदासीनता और विफलता के कारण यह प्लांट चालू होने के साथ ही बंद भी हो गया। और अब तक चार साल बाद भी बंद हीं है। जिसके कारण इसमें लगे अधिकांश उपकरण खराब हो गए है। प्लांट के बंद रहने के कारण पूरे नगर निगम का कचरा एनएच 42 के किनारे गिराया जा रहा है। जिसके कारण कई वार्ड के लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

शहर को साफ सुथरा रखने के साथ कचरे से बने खाद की बिक्री के मकसद से इस प्लांट को सेट किया गया था। इसके लिए तत्कालीन नगर परिषद के कोष से चार करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की गई। लेकिन, नगर परिषद को एक रुपए की आमदनी नहीं हुई। शहर से प्रतिदिन 100 टन से ज्यादा कचरा निकलता है। इतना कचरे के डिस्पोजल के लिए नगर निगम के पास जमीन नहीं है।

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