यहाँ के बुजुर्गों का मानना है कि इस मंदिर को बनाने वाले कारीगर को भी अपनी हाथ गवानी पड़ी थी?

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पश्चिमी चंपारण:सावन के महीने में शिव भक्तों की भीड़ देखते ही बनती है। हर शिवभक्त देवघर जरूर जाना चाहते है। आज हम आपको पश्चिमी चम्पारण जिला के रामनगर में स्थिति एक अद्भुत शिव मंदिर के बारे में बताते है।
रामनगर भारत-नेपाल और बिहार – उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित है। हर साल लाखो लोग वाल्मीकिनगर के गंडक या त्रिवेणी नदी से जल लेके कावर के साथ यहाँ आते है। इस कावर यात्रा में 2 दिनों का समय लगता है। काँवरिया और बम बीच में कही-कही समय-समय पे आराम करते हुए आगे बढ़ते है। गंडक या त्रिवेदी नदी से जल लेकर आने जाने के लिए वाल्मीकिनगर के जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है।

अगर कांवरिये समय से पहुँच जाते है तो सबुनि पोखरा नामक एक जगह है जहाँ सुबह तक समय की प्रतीक्षा करते है और अगले दिन प्रातः काल ही भोलेनाथ के मंदिर में जल चढ़ाकर अपनी आस्था पूरा करते है। वैसे कावड़ियों की सुविधा के लिए सबुनि पोखरा पे हर तरह की व्यवस्था रहती है। रास्ते में भी आने जाने वाले कावरियों का ख्याल रखा जाता है। महाकाल की भक्ति में लीन शिव भक्त बड़े आराम से किसी भी दुर्गम रास्ते को पार कर जाते है, ये भोलेनाथ की महिमा ही है। यहाँ बोले नाथ के दर्शन के लिए बच्चे, जवान और बुजुर्ग सब आते है। यहाँ लाखों की भीड़ को देख मन मंत्रमुग्ध हो जाता है।

लेकिन इस बार कोरोना महामारी की वजह से लोगों का आना जाना बंद पड़ा हैं। ऐसे में अगर ये महामारी नहीं होती तो यहां लाखों की संख्या लोग जल अर्पित करने के लिए आते। यहाँ भव्य मेला भी लगता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु जल अर्पण के बाद मेले का आंनद लेते है। इस मेले से सैकडों लोगों का रोजगार भी जुड़ा होता है लेकिन कोरोना महामारी से सब कुछ प्रभावित है।

वैसे लोग कहते है कि इस शिव मंदिर को यहाँ के राजा ने बनवाया था और यह देखने में बहुत सुंदर और भव्य मंदिर है। यहाँ के बुजुर्गों का मानना है कि ताजमहल के कारीगर की तरह इस मंदिर को बनाने वाले कारीगर को भी अपने एक हाथ की बलि देनी पड़ी थी। लेकिन ताजमहल के विषय में इतिहासकार ऐसा नहीं मानते है। बुजुर्ग ये भी कहते है कि कोलकाता का हावड़ा ब्रिज और शिव मंदिर दोनो को एक ही कारीगर ने बनाया था। ये यहाँ के स्थानीय लोगों का यहीं मानना है।

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