मुम्बई पहुँचते ही पटना एसपी को ज़बरन किया गया क्वारंटीन, जानिए विनय तिवारी का चंपारण कनेक्शन

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हर दिन एक नए मोड़ के साथ सुशांत सिंह राजपूत के कथित आत्महत्या का मामला आगे बढ़ रहा है। पटना में केस दर्ज होने के बाद बिहार पुलिस मुम्बई पहुँच कर केस की छानबीन कर रही है। लेकिन इस टीम का नेतृत्व करने के लिए अब पटना SP विनय ॐ तिवारी को भेज गया है।

विनय तिवारी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ललितपुर गाँव के रहने वाले है। उनके पिता एक किसान हैं। चंपारण से सटा हुआ जिला गोपालगंज में उन्होंने SDPO के पद पर रहते हुए कई केस को सुलझाया है। इसके बाद 2019 में उन्हें पटना SP की कमान सौंपी गई थी।

पटना से गई पुलिस टीम को मुम्बई पुलिस की ओर से किसी तरह की कोई मदद या सहयोग नहीं मिल पा रहा है। अब तक इस मामले में मुम्बई पुलिस ने बिहार पुलिस के लिए एक गाड़ी तक मुहैया नहीं करा सकी है, जिससे बिहार पुलिस ऑटोरिक्शा में ही घूम कर पूरी मुम्बई में छानबीन कर रही है। इसको लेकर महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी बिहार पुलिस को किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही है।
सोशल मीडिया पर लगातार सुशांत के फैंस मुम्बई पुलिस पर भेद भाव का आरोप लगा रहे है। इस दौरान एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमे बिहार की टीम को मीडिया के सवालों से बचाते हुए एक अपराधी की तरह ले जाया जा रहा था। अब बिहार पुलिस के मुम्बई में जाकर छानबीन करने से वहाँ की पुलिस क्यों इतनी बौखलाई हुई है ये गौर करने वाली बात है?

अब इस मामले में छानबीन के लिए पटना एसपी और आईपीएस ऑफिसर विनय तिवारी को मुम्बई भेजा गया है। विनय तिवारी के मुम्बई पहुँचते ही बेचैन मुम्बई पुलिस ने आनन-फानन में उन्हें जबर्दस्ती क्वारंटीन कर दिया गया। विनय तिवारी पटना से गई पुलिस टीम का नेतृत्व करने गए हैं। बिहार के DGP ने ट्वीट करते हुए कहा कि “ये हैं बिहार cadre के IPS अधिकारी विनय तिवारी जिनको मुंबई में आज रात में 11 बजे रात में ज़बरदस्ती क्वोरंटीन कर दिया गया.SSR केस में जाँच करनेवाली टीम का नेतृत्व करने गए थे.अब ये यहाँ से कहीं निकल नहीं सकते!

लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि जब बिहार पुलिस के चार लोगों की टीम मुम्बई गई तो उन्हें क्वोरंटीन नहीं किया गया लेकिन जैसे ही IPS विनय तिवारी मुम्बई पहुँचे तो उनको जबर्दस्ती बंद कर दिया गया। मुम्बई के प्रशासनिक अधिकारियों का ये रवैया कई संदेह पैदा करता है कि अगर मुम्बई पुलिस निष्पक्ष रूप से जांच कर रही थी तो बिहार पुलिस के वहाँ जाने से क्यों परेशान है और उनकी मदद क्यों नहीं कर रही है? इसके बाद जब आईपीएस विनय तिवारी को इस जांच टीम का नेतृत्व करने के लिए भेज गया तो जबर्दस्ती उन्हें क्यों क्वारंटाइन कर दिया गया? क्या मुम्बई पुलिस इस मामले में किसी को बचाने की कोशिश कर रही है?

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