चौकिये नहीं, ये मंगल ग्रह या चांद की तस्वीर नहीं है जहाँ जीवन और पानी की खोज अधूरी है! ये तो…

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ये हमारे पृथ्वी पर अवस्थित रक्सौल शहर की तस्वीर है जहाँ विकास वाले पजामे में कहीं-कहीं झेद हो गया है।

ये रक्सौल का मेन रोड है जो भारत और नेपाल को जोड़ता है। एक नेशनल हाइवे होने के साथ साथ एक अंतरष्ट्रीय मार्ग भी है। दिल्ली और काठमांडू को जोड़ने वाले इस मार्ग की हालात बहुत दयनीय है। इस पूरे हाइवे में आपको अनगिनत गड्ढे मिलेंगे। ऊपर से देखने में ये किसी ग्रह की सतह जैसा दिखने लगा है। जैसा हम नासा की तस्वीरों में देखते है। लेकिन ये हालात रक्सौल की जमीनी हकीकत है। सड़क बनने के साथ ही टूटना भी शुरू हो जाता है लेकिन कोई सवाल नहीं करता की सड़क बनाने का पैमाना क्या होना चाहिए? इसकी गुणवक्ता चेक करने वाले अधिकारी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है लेकिन ऐसा होता नहीं है। कई बार ऐसी खबरें आती है कि पैसों की बल पर सड़क की गुणवक्ता को दबा दिया जाता है।

रक्सौल में रोड (नेशन हाइवे )

खैर ये सिर्फ रक्सौल मेन की स्थिति नहीं है आसपास के इलाकों और गावों की स्थिति इससे भी खराब है जहाँ सड़क तो बनता है लेकिन एक महीने बाद ही टूटना शुरू हो जाता है और छह महीने बाद तो पता भी नहीं चलता की वहाँ सड़क भी थी। आमतौर पे गांवों में भारी गाड़िया भी नहीं चलती है लेकिन फिर भी सड़क टूट ही जाते है। अब आप विचार कीजिए की इन परिस्थितियों में विकास कितना संभव है?

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